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आईपीओ या स्टॉक

आईपीओ या स्टॉक
बैंड प्राइस तय होने के बाद किसी भी कीमत के लिए बोली लगाईं जा सकती है | इसमें व्यक्ति कटऑफ बोली भी लगा सकता है | कंपनी इसमें एक ऐसा मूल्य तय करती है, जहां पर उसे अंदाजा होता है कि उसके पुरे शेयर बिक जाएंगे |

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क्या IPO से पहले अनलिस्टेड मार्केट के जरिए किसी स्टॉक में निवेश करना सही है? जानिए एक्सपर्ट की राय

क्या IPO से पहले अनलिस्टेड मार्केट के जरिए किसी स्टॉक में निवेश करना सही है? जानिए एक्सपर्ट की राय

TV9 Bharatvarsh | Edited By: रोहित ओझा

Updated on: Sep 12, 2021 | 7:08 AM

शेयर बाजार इस समय रिकॉर्ड आईपीओ या स्टॉक हाई पर है. ऐसे में कंपनियां मौके का फायदा उठाकर IPO ला रही हैं. इस साल अब तक दर्जनों आईपीओ आ चुके हैं और दर्जनों आईपीओ आने बाकी हैं. कई निवेशक ऐसे भी हैं जो आईपीओ आने से पहले ग्रे मार्केट मार्केट में उस कंपनी का शेयर खरीदते हैं. उन्हें इस बात की उम्मीद रहती है कि रिटर्न बेहतर मिलेगा. क्या यह निवेश का सही रास्ता है, आइए इसके बारे में जानते हैं.

शेयर बाजार के जानकारों का कहना है कि बाजार इस समय रिकॉर्ड हाई पर है. इसके अलावा कई सक्सेफुल आईपीओ पहले ही आ चुके हैं. ऐसे में हाल फिहाल में कई ऐसी कंपनियां भी लिस्ट हुई हैं जो निवेशकों को उम्मीद के मुताबिक रिटर्न देने में निराश रही हैं. इकोनॉमिक टाइम्स में छपी रिपोर्ट में ग्रे मार्केट में निवेश को लेकर आशिका वेल्थ एडवाइजरी के अमित जैन का कहना है कि अगर कोई निवेशक लंबे समय के लिए निवेश करना चाहता है तो ग्रे मार्केट में खरीदारी करना सही विकल्प है.

छह महीने का लॉक-इन पीरियड होता है

नियम के मुताबिक अगर कोई अनलिस्टेड शेयर खरीदता है और वह कंपनी शेयर बाजार में लिस्ट होती है तो निवेशक को कम से कम छह महीने के लिए निवेश रखना पड़ता है. यह लॉक-इन पीरियड होता है. ऐसे में जो निवेशक IPO से पहले उसमें निवेश करते हैं वे कंपनी के लिस्ट होने के छह महीने तक बाहर नहीं निकल सकते हैं. पहले लॉक-इन पीरियड 1 साल का था जिसे सेबी ने घटाकर 6 महीना किया है.आईपीओ या स्टॉक

आने वाले दिनों में Mobikwik, Paytm, Sterlite Power Transmission जैसी कंपनियों का आईपीओ आने वाला है. ग्रे मार्केट या फिर अनलिस्टेड मार्केट में इन शेयर्स के प्रति निवेशकों में जबरदस्त क्रेज है.

अनलिस्टेड मार्केट में कीमत ज्यादा-कम दोनों हो सकता है

बाजार के जानकारों के मुताबिक, अनलिस्टेड मार्केट में किसी कंपनी के शेयर का भाव आईपीओ के इश्यू प्राइस के मुकाबले ज्यादा होता है. उदाहरण के तौर पर राकेश झुनझुनवाला के निवेश वाली कंपनी Barbeque Nation ग्रे मार्केट में 900 रुपए के स्तर पर ट्रेड कर रहा था, आईपीओ या स्टॉक जबकि इस आईपीओ का इश्यू प्राइस 500 रुपए था. इस सप्ताह यह शेयर 1134 रुपए पर बंद हुआ जबकि अभी तक का उच्चतम स्तर 1268 रुपए है.

दूसरी तरफ राकेश झुनझुनवाला की निवेश वाली एक और कंपनी Nazara Technologies का आईपीओ आने से पहले यह ग्रे मार्केट में 400 रुपए के स्तर पर मिल रहा था. आईपीओ के लिए इश्यू प्राइस 1100 रुपए के करीब था जबकि इस सप्ताह यह 1785 रुपए के स्तर पर बंद हुआ.

किसे कहते हैं आईपीओ, कैसे होता है निवेश, किन बातों का रखें का ध्‍यान, जानि‍ए यहां

किसे कहते हैं आईपीओ, कैसे होता है निवेश, किन बातों का रखें का ध्‍यान, जानि‍ए यहां

कोविड -19 महामारी के प्रभाव के बावजूद, ऐसा लगता है कि देश में इस साल रिकॉर्ड संख्या में आईपीओ आएंगे। (Photo By Financial Express Archive)

इस मानसून भारत में आईपीओ की बारिश हो रही है। पिछले सात महीनों में 40 आईपीओ पहले ही आ चुके हैं। वहीं कई आईपीओ कतार में लगे हुए हैं। जबकि पूरे 2020 में 33 और 2019 में 49 आईपीओ आए थे। कोविड -19 महामारी के प्रभाव के बावजूद, ऐसा लगता है कि देश में इस साल रिकॉर्ड संख्या में आईपीओ आएंगे। जिससे निवेशकों को भी कमाई करने का भरपूर मौका मिलेगा। पहले यह समझना काफी जरूरी है कि आख‍िर आईपीओ है क्‍या और यह काम कैसे करता है। साथ ही निवेशकों को आईपीओ में निवेश करने से पहले किन बातों आईपीओ या स्टॉक का ध्‍यान रखना काफी जरूरी है।

काम की खबर: नजारा का IPO तो खुला, लेकिन जानिए कैसे करें IPO में निवेश, डीमैट अकाउंट है जरूरी

हमारे देश में बचत के पैसे लगाने यानी निवेश करने के कई तरीके हैं। इन्ही में से एक है 'इनीशियल पब्लिक ऑफर' यानि IPO। निवेश का ये तरीका आज कल ट्रेंड में है। अगर आप भी IPO में निवेश करने का प्लान बना रहे हैं या करना चाहते हैं तो सबसे पहले ये समझ लीजिए कि IPO क्या होता है? दरअसल, जब कोई कंपनी अपने स्टॉक या शेयर्स छोटे-बड़े निवेशकों के लिए जारी करती है तो उसका जरिया IPO होता है। इसके बाद कंपनी शेयर बाजार में लिस्ट होती है।

IPO होता क्या है?
जब कोई कंपनी पहली बार अपनी कंपनी के शेयर्स को लोगों को ऑफर करती है तो इसे IPO कहते हैं। कंपनियों द्वारा ये IPO इसलिए जारी किया जाता है जिससे वह शेयर बाजार में आ सके। शेयर बाजार में उतरने के बाद कंपनी आईपीओ या स्टॉक आईपीओ या स्टॉक के शेयरों की खरीदारी और बिकवाली शेयर बाजार में हो सकेगी। यदि एक बार कंपनी आईपीओ या स्टॉक के शेयरों की ट्रेडिंग की इजाजत मिल जाए तो फिर इन्हें खरीदा और बेचा जा सकता है। इसके बाद शेयर को खरीदने और बेचने से होने वाले फायदे और नुकसान में भागीदारी निवेशकों की होती है।

आईपीओ (IPO) क्या है

शेयर मार्केट में इन्वेस्ट करना चाहते है परन्तु नॉलेज के आभाव के कारण इन्वेस्ट (Invest) नहीं कर पाते है | यदि पता भी होता है तो फिर भी पूरे नियम नहीं पता होते है | जिस कारण उन्हें कभी नुकसान का भी सामना करना पड़ता है | बहुत सी बड़ी कंपनियां अपनी कम्पनी में इन्वेस्टर्स को बढ़ाने के लिए आईपीओ (IPO) का इस्तेमाल करके मदद लेती रही है

| प्रसिद्द एवं लाभ कमाने वाली कंपनियों के आईपीओ (IPO), शेयर बाजार में बिजनेस करने वालों के लिए बड़ा आकर्षण केंद्र होता हैं। अगर शेयर बाजार की बात की जाये तो बाजार की चाल कुछ ही समय में कुछ और होती है तो दूसरे ही समय बाद स्टॉक मार्केट को समझना थोड़ा कठिन हो जाता है | यदि आप भी आईपीओ (IPO) क्या है, IPO का फुल फॉर्म, IPO में ऑनलाइन निवेश कैसे करे, इसके विषय में जानना चाहते है तो यहाँ पर पूरी जानकारी दी जा रही है |

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आईपीओ (IPO) का फुल फॉर्म “Initial Public Offering” होता है, इसका हिंदी में उच्चारण “इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग्स” होता है | इसका हिंदी में अर्थ “प्रारंभिक सार्वजनिक प्रस्ताव” होता है | जिसका प्रयोग शेयर बाजार में प्रमुख भूमिका होती है |

आईपीओ का क्या मतलब है

आईपीओ (IPO), वह प्रक्रिया है, जब कोई कंपनी, फर्स्ट टाइम अपने शेयरों को पब्लिक या सामान्य जनता के समक्ष खरीदने की पेशकश रखता है। इसी वजह से इसे प्रारंभिक सार्वजनिक प्रस्ताव (Initial Public Offering) कहते है। यही प्रक्रिया IPO होती हैं।

साधारणत: प्राइवेट कंपनियां या कॉर्पोरेशन कंपनियां, कम्पनी के लिए बडी मात्रा में पूंजी एकत्र करने के लिए आईपीओ की सुविधा पेश की जाती हैं। कई क्षेत्रों में सरकारी कंपनियां भी विनिवेश (disinvestment) के द्वारा पूंजी एकत्रित करने के लिए आईपीओ (IPO) लाती हैं। विनिवेश के प्रोसेस में, शेयर मार्केट के द्वारा, कोई – कोई सरकारी कम्पनिया अपनी कुछ हिस्सेदारी, लोगों को भी बेचती है | कंपनी बाज़ार से पूँजी इक्कठा कर अपने बिज़नेस में एक्सपेंशन करती है और ज्यादा मुनाफा आईपीओ या स्टॉक कमाकर अपने शेयर धारको के बीच बाटती है | इससे कंपनी और कंपनी में निवेश करने वाले निवेशक को भी लाभ मिलता है |

आईपीओ (IPO) की कीमत तय की प्रक्रिया

  • प्राइस बैंड (Price Band) |
  • दूसरा फिक्स्ड प्राइस इश्यू (Fixed price Issue)।

जिन कंपनियों को आईपीओ (IPO) लाने की अनुमति प्राप्त हो जाती है तो उसे अपने सभी शेयरों की कीमत तय करने का अधिकार होता हैं | इसके अलावा इन्फ्रास्ट्रक्चर और कुछ अन्य क्षेत्रों की कंपनियों को सेबी (SEBI) और बैंकों को रिजर्व बैंक (RBI) से अनुमति लेना जरूरी होता है | भारत में 20 फीसदी प्राइस बैंड की ही अनुमति प्रदान की गई है |

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मार्केट विश्लेषकों का मानना है कि पेटीएम का एक्सपेंसिव वैल्यूएशन यानी ऊंची कीमत इसके स्टॉक प्राइस में गिरावट की वजह रही है. Macquarie Research फर्म के विश्लेषकों ने एक नोट में कहा कि कंपनी के बिजनेस मॉडल में 'फोकस और डायरेक्शन की कमी है.' कंपनी ने यह भी कहा कि कंपनी के लिए प्रॉफिटेबल बनना अभी बड़ी चुनौती है.

बता दें कि डिजिटल मोबाइल पेमेंट सेक्टर की शीर्ष की कंपनी Paytm देश का अब तक का सबसे बड़ा आईपीओ आईपीओ या स्टॉक लेकर आया था. 18,300 करोड़ का यह आईपीओ अब तक के सबसे बड़े आईपीओ- Coal India के 15,000 करोड़ के आईपीओ- से भी बड़ा था. नवंबर 10 को कंपनी का आईपीओ बंद हुआ था, जिसके बाद आज शेयर मार्केट में इसका ट्रेडिंग आईपीओ या स्टॉक डेब्यू हुआ है. पेटीएम के आईपीओ को बिडिंग प्रोसेस के खत्म होने तक 1.89 गुना तक सब्सक्राइब किया गया था.

आईपीओ खुलने के बाद ही दिखी थी कमजोर प्रतिक्रिया

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